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RDG पर सियासी घमासान: अनुराग ठाकुर बोले—FC-16 में हिमाचल का डेवोल्यूशन ₹2,388 करोड़ बढ़ा

➤ RDG अस्थायी व्यवस्था थी, FC-16 ने नियमित अनुदान नहीं सुझाया: अनुराग
➤ विभाज्य पूल में हिमाचल की हिस्सेदारी 0.830% से बढ़कर 0.914%
➤ पोस्ट-डेवोल्यूशन प्राप्ति ₹11,561.66 करोड़ से बढ़कर ₹13,949.97 करोड़



हमीरपुर से सांसद व पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर ने रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट (RDG) को लेकर प्रदेश सरकार के आरोपों पर विस्तृत प्रस्तुति साझा करते हुए कहा कि FC-16 की सिफारिशों में हिमाचल के साथ कोई अन्याय नहीं हुआ, बल्कि केंद्रीय कर डेवोल्यूशन में राज्य की हिस्सेदारी बढ़ी है।

उन्होंने बताया कि 15वें वित्त आयोग में हिमाचल की हिस्सेदारी 0.830% थी, जिसे 16वें वित्त आयोग में बढ़ाकर 0.914% किया गया। इसके चलते 2025-26 के बजट अनुमान में हिमाचल की पोस्ट-डेवोल्यूशन प्राप्ति लगभग ₹11,561.66 करोड़ से बढ़कर ₹13,949.97 करोड़ हो गई, यानी करीब ₹2,388 करोड़ की वृद्धि।

अनुराग के अनुसार RDG कोई स्थायी प्रावधान नहीं था। इसे पहले भी समय-बद्ध, संक्रमणकालीन उपाय के रूप में दिया गया था ताकि राज्य राजस्व घाटा कम कर सकें। FC-16 ने समीक्षा के बाद पाया कि कई राज्यों में कर प्रयास कमजोर रहे और प्रतिबद्ध राजस्व व्यय ऊंचा रहा, जिससे RDG सुधारात्मक की बजाय आवर्ती ट्रांसफर बन गया। इसलिए नियमित RDG जारी रखने के बजाय टार्गेटेड उपाय और बढ़ी हुई डेवोल्यूशन पर जोर दिया गया।

उन्होंने हिमाचल बनाम उत्तराखंड के वित्तीय संकेतकों का हवाला देते हुए कहा कि:

  • स्वयं कर प्रयास: हिमाचल ~5.6% GSDP, उत्तराखंड ~6.1%

  • राजस्व व्यय: हिमाचल ~21% GSDP, उत्तराखंड ~15%

  • राजकोषीय/राजस्व घाटा: हिमाचल ~5.3% / ~2.6%, उत्तराखंड ~2.5% / ~1.1% अधिशेष

  • ऋण बोझ: हिमाचल ~42.8% GSDP, उत्तराखंड ~25.5%

  • पूंजीगत व्यय का हिस्सा अपेक्षाकृत कम

अनुराग ने कहा कि ये मापदंड बताते हैं कि FC-16 का निर्णय मापनीय वित्तीय वास्तविकताओं पर आधारित है, न कि पक्षपात पर। उन्होंने प्रदेश सरकार से वित्तीय अनुशासन, कर प्रयास और उत्पादक निवेश बढ़ाने पर ध्यान देने की अपील की।